नाथ परंपरा में एक शब्द बार-बार आता है — नवनाथ, अर्थात नौ नाथ सिद्ध। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर भारत तक इनकी कथाएँ सुनाई जाती हैं, इनके नाम से ग्रंथ पढ़े जाते हैं, और इनके समाधि-स्थलों पर आज भी श्रद्धालु जाते हैं।
पर जैसे ही कोई गंभीरता से पूछता है — “नवनाथ के नौ नाम कौन-से हैं?” — उत्तर में उलझन शुरू हो जाती है। कारण यह कि एक नहीं, कई सूचियाँ प्रचलित हैं। इस लेख में हम सबसे स्वीकृत सूची भी देखेंगे, और यह भी कि मतभेद कहाँ है।
नवनाथ के नौ नाम
सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत सूची यह मानी जाती है:
- मत्स्येंद्रनाथ — परंपरा के आदि आचार्य, नौवीं शताब्दी के आसपास माने जाते हैं
- गोरक्षनाथ — अर्थात गुरु गोरखनाथ, जिन्होंने नाथ संप्रदाय को संगठित रूप दिया
- जालंधरनाथ
- कानिफनाथ (कनिफनाथ)
- गहिनीनाथ
- भर्तृनाथ — जिन्हें लोक-परंपरा में राजा भर्तृहरि से जोड़ा जाता है
- रेवणनाथ
- चर्पटनाथ (चर्पटाक्षनाथ)
- नागनाथ
यह सूची नवनाथ संप्रदाय की परंपरा में सबसे अधिक मान्य है — विशेषकर उस धारा में जिससे आधुनिक काल में निसर्गदत्त महाराज जैसे संत जुड़े रहे।
एक ज़रूरी सच: सूचियाँ एक जैसी नहीं हैं
यहाँ ईमानदारी ज़रूरी है, क्योंकि इंटरनेट पर हर जगह अलग-अलग नाम मिलते हैं और पाठक भ्रमित होता है।
वास्तविकता यह है कि नवनाथ की कम से कम आठ अलग-अलग सूचियाँ दर्ज हैं। इनमें अधिकांश नाम समान रहते हैं, पर कुछ बदल जाते हैं — जैसे चर्पटीनाथ, मंगलनाथ, घुघोनाथ या गोपीनाथ भी विभिन्न सूचियों में गिने जाते हैं।
इसका अर्थ यह नहीं कि परंपरा अप्रामाणिक है। इसका अर्थ केवल इतना है कि नाथ परंपरा कई क्षेत्रों में, कई शताब्दियों तक, मौखिक रूप से फैली — और हर क्षेत्र ने अपने प्रमुख सिद्धों को नौ में गिना। जो व्यक्ति “एकमात्र सही सूची” का दावा करे, वह परंपरा को सरल बना रहा है।
दत्तात्रेय और नाथ परंपरा का संबंध
नाथ परंपरा की एक मान्यता के अनुसार ऋषि दत्तात्रेय — जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का संयुक्त अवतार माना जाता है — इस परंपरा के प्रथम गुरु हैं।
दूसरी मान्यता कहती है कि मत्स्येंद्रनाथ को दीक्षा सीधे स्वयं शिव से मिली, जिन्हें इस संदर्भ में आदिनाथ कहा जाता है।
दोनों धाराएँ परंपरा में साथ-साथ चलती हैं, और अलग-अलग क्षेत्रों में एक या दूसरी को प्रमुखता मिलती है। यह वही स्वर है जो हिमालय की सिद्ध परंपरा में भी सुनाई देता है — गुरु-शृंखला अंततः किसी दिव्य स्रोत तक जाती है।
नवनाथ भक्तिसार — परंपरा का मुख्य ग्रंथ
नवनाथ की कथाएँ जिस ग्रंथ के माध्यम से घर-घर पहुँचीं, वह है श्री नवनाथ भक्तिसार — मराठी में रचित एक भक्ति-ग्रंथ।
परंपरा के अनुसार इसकी रचना सन 1741 में कविराज धुंडीसुत मालू ने की, और इसमें 40 अध्याय हैं। महाराष्ट्र में यह ग्रंथ आज भी पारायण के रूप में पढ़ा जाता है, और नाथ संप्रदाय का मानक कथा-ग्रंथ माना जाता है।
ध्यान देने की बात: यह ग्रंथ भक्ति-साहित्य है, इतिहास-लेखन नहीं। इसमें आने वाली चमत्कार-कथाएँ श्रद्धा की भाषा में कही गई हैं, और उन्हें उसी रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
नवनाथ में सबसे प्रसिद्ध कौन?
नौ में से कुछ नाम लोक-स्मृति में अधिक गहरे उतरे हैं:
- मत्स्येंद्रनाथ — परंपरा के आदि आचार्य, गोरखनाथ के गुरु। नेपाल में इनसे जुड़ी उपासना-परंपरा आज भी जीवित है।
- गोरक्षनाथ — सबसे प्रभावशाली नाम; गोरखपुर नगर इन्हीं के नाम पर है। विस्तार से पढ़ें: गुरु गोरखनाथ कौन थे।
- कानिफनाथ — महाराष्ट्र में अत्यंत लोकप्रिय; इनके समाधि-स्थल पर बड़ा श्रद्धालु-समागम होता है।
- गहिनीनाथ — इन्हें संत निवृत्तिनाथ का गुरु माना जाता है, और इसी सूत्र से नाथ परंपरा महाराष्ट्र की वारकरी धारा से जुड़ती है।
- भर्तृनाथ — लोक-कथाओं में राजा भर्तृहरि, जिन्होंने राज्य त्यागकर योग-मार्ग अपनाया।
इतिहास कहाँ तक साथ देता है?
यह प्रश्न टालना नहीं चाहिए।
अपेक्षाकृत प्रमाणित: मत्स्येंद्रनाथ को नौवीं शताब्दी के आसपास रखा जाता है। गोरखनाथ के अस्तित्व, उनके ग्रंथों और मठ-परंपरा के ऐतिहासिक संकेत उपलब्ध हैं। नाथ संप्रदाय एक वास्तविक, संगठित, आज भी सक्रिय परंपरा है।
मुख्यतः परंपरा-आधारित: शेष नाथों का काल-निर्धारण, उनके पारस्परिक संबंध, और चमत्कार-कथाएँ। इनके लिए स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रमाण प्रायः उपलब्ध नहीं हैं।
यही कारण है कि इस लेख में हमने “नौ में से हर एक की जीवनी” जैसा दावा नहीं किया — जितना प्रमाणित है, उतना ही कहा है। यही दृष्टिकोण हमने क्रिया योग और महावतार बाबाजी के विषय में भी रखा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवनाथ के नौ नाम क्या हैं?
सबसे स्वीकृत सूची: मत्स्येंद्रनाथ, गोरक्षनाथ, जालंधरनाथ, कानिफनाथ, गहिनीनाथ, भर्तृनाथ, रेवणनाथ, चर्पटनाथ और नागनाथ। अन्य सूचियों में कुछ नाम बदल जाते हैं।
क्या नवनाथ और नाथ संप्रदाय एक ही हैं?
नाथ संप्रदाय पूरी परंपरा है; नवनाथ उस परंपरा के नौ प्रमुख सिद्ध हैं जिन्हें सामूहिक रूप से भी पूजा जाता है और अलग-अलग भी।
नवनाथ के प्रथम गुरु कौन माने जाते हैं?
एक मान्यता में ऋषि दत्तात्रेय, दूसरी में स्वयं शिव (आदिनाथ), जिनसे मत्स्येंद्रनाथ को दीक्षा मिली।
नवनाथ भक्तिसार क्या है?
मराठी का भक्ति-ग्रंथ, परंपरा के अनुसार 1741 ई. में कविराज धुंडीसुत मालू द्वारा रचित, 40 अध्यायों में। नाथ परंपरा का सबसे प्रचलित कथा-ग्रंथ।
निष्कर्ष
नवनाथ की सूचियों में मतभेद होना कोई कमज़ोरी नहीं — यह इस बात का प्रमाण है कि परंपरा किसी एक मठ की संपत्ति नहीं रही। वह कश्मीर से महाराष्ट्र तक, नेपाल से पंजाब तक फैली, और हर भूमि ने उसमें अपने सिद्ध जोड़े।
जो बात सब सूचियों में समान रहती है, वह नाम नहीं — वह दृष्टि है: कि शरीर स्वयं साधना का क्षेत्र है, कि गुरु के बिना मार्ग नहीं खुलता, और कि सिद्धि का द्वार जाति या जन्म से नहीं, अभ्यास से खुलता है।
आगे पढ़ें — गुरु गोरखनाथ कौन थे · क्रिया योग क्या है · ज्ञानगंज कहाँ है






